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दुविधा

duvidha

रामकृष्ण परार्थी

और अधिकरामकृष्ण परार्थी

    बहिनजी लिखैत रहैत छथि

    स्त्री विमर्शक कथा-कविता

    स्त्री हक-अधिकार लेल उठबैत रहैत छथि आवाज

    हुनकर हार्दिक इच्छा रहैत छनि

    स्त्री-शोषणमुक्त बनय नबका समाज

    हँ, गप्प दिगर अछि जे बहिनजी

    ब्राह्मणवादक परिधिमे रहैत छथि

    सदिखन ठाढ़

    हुनकर आदर्श छनि

    नारीकेँ ताड़नाक अधिकारी कहयबला तुलसीदास

    विरोधाभाषसँ भरल छनि हुनकर स्वभाव

    स्त्री स्वतंत्रताक प्रबल विरोधी मनु महराजक

    विरोधमे नहि फुजैत छनि हुनकर बकार

    पथभ्रष्ट, धर्मभ्रष्ट बुझना जाइत छनि हुनका

    नारी समाजक उत्थानक अग्रदूत

    बुद्ध, अंबेडकर, फुले, पेरियार

    दलित विमर्श पर हुनका उठैत छनि आक्रोश

    देवदासी परंपरा, सबरीमाला विवाद सन गम्भीर

    स्त्री समस्याकेँ नहि करैत छथि प्रतिरोध

    बाँसक कमचीसँ सूप बिनैत स्त्री

    हुनका बुझना जाइत छनि डोमिन

    नगरपालिकाक सड़क बहारैत स्त्री मेहतराइन

    एगो स्त्रीसँ बेसी स्वयंकेँ मानैत छथि पंडिताइन।

    स्रोत :
    • पुस्तक : विद्रोही बसात (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 20)
    • रचनाकार : रामकृष्ण परार्थी
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2024

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