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दोस्तों की मंडली में

doston ki manDli mein

अनुवाद : श्यौराजसिंह जैन

इवान स्लाम्निग

इवान स्लाम्निग

दोस्तों की मंडली में

इवान स्लाम्निग

और अधिकइवान स्लाम्निग

    दोस्तों की मंडली

    हड़बड़ाहट में जमा हुई जो

    उलझ गई मदिरा से

    और ज्यों ही हमने चाहा कि कुछ कहें

    एक मस्तराम ने निकाली अपनी पुरानी घड़ी

    जो निठुर और चुस्त टिक-टिक कर रही थी

    उसने अपनी पहली धुन बजाई

    हमने पुनः कुछ कहना चाहा

    कि उसने फिर ज़ंजीर खींची

    और फिर घड़ी की टिक-टिक

    इस बार दूसरी धुन

    जो 'पोल्का' से मिलती थी उतनी

    जितनी पहली 'वाल्त्स' से

    लालसा से कि कुछ कहेंगे हम सुनते रहे

    अंत में होट खोले ही कि उसने फिर निकाला

    एक यों प्यारा-सा ‘मेन्यूएट'

    जैसे कि साधारणतया सभी 'मेन्यूएट' होते हैं

    और विशेषकर पुरानी घड़ियों के

    दो और धुनें सुनी हमने

    क्योंकि पुरानी घड़ी में पाँच धुनें थीं

    और बस हम कुछ कहना ही चाहते थे

    कि घड़ी में फिर चाबी भरी गई

    और फिर सुनाई दिया पुराना 'वाल्स'

    फिर 'पोल्का'

    फिर 'मेन्यूएट'

    और शेष दो धुनें

    फिर

    स्रोत :
    • पुस्तक : समकालीन यूगोस्लाव कविता-1 (पृष्ठ 147)
    • संपादक : श्यौराजसिंह जैन
    • रचनाकार : इवान स्लाम्निग
    • प्रकाशन : बाहरी पब्लिकेशंस, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1978

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