दो शीर्षकहीन कविताएँ
do shirshakhin kavitayen
(1)
1923 की शरद ऋतु में सिने तारिका लीविया रीमीनी की मृत्यु हुई
उसके नहान टब में।
उन्होंने उसे मृत्यु की गंध में लिपटा पाया
और पानी अब तक ठंडा नहीं हुआ था।
फिर भी कल चलचित्रगृह में
उसने निहारा मुझे अर्थहीन आँखों से।
(2)
जब हम क़ाबू पाने जा रहे थे; उन्होंने कहा कि हम जीतेंगे।
हमें क़ाबू में कर लिया गया और मिली हमें राख।
जब हम प्रेम करने जा रहे थे, उन्होंने कहा कि हम जीतेंगे।
हमने प्रेम किया और मिली हमें राख।
जब हम अपनी ज़िंदगियों का परित्याग करने जा रहे थे;
उन्होंने कहा कि हम जीतेंगे। हमने अपनी ज़िंदगियों का परित्याग कर दिया
और मिली हमें राख...
मिली हमें राख। वह आराम फरमा रही है हमारी ज़िंदगियाँ फिर से
हासिल करने के लिए,
अब जबकि कल्पना करने को हमारे पास कुछ भी नहीं बचा,
वह जो ज़िंदगी को हासिल करने जा रहा है...
हमारी ही जमात में शामिल होने जैसा हो जाएगा,
बस्स्; याददाश्त के मामले में थोड़ा ज़्यादा कड़ियल।
- पुस्तक : रोशनी की खिड़कियाँ (पृष्ठ 178)
- रचनाकार : ज्योर्ज सेफ़ेरिस
- प्रकाशन : मेधा बुक्स
- संस्करण : 2003
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