देश हेतु काज से करैत छी कतेक?
desh hetu kaaj se karait chhi katek?
चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’
Chandranath Mishra 'Amar'
देश हेतु काज से करैत छी कतेक?
desh hetu kaaj se karait chhi katek?
Chandranath Mishra 'Amar'
चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’
और अधिकचन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’
सानि माटि, पानिमे ललाटमे लगाउ,
गाम-गाम घूमि कऽ समाजकेँ जगाउ,
भयान भ्रान्ति भूतकेँ सिमानसँ भगाउ,
एकताक मूलमन्त्र झूमि-झूमि गाउ।
भूमिजाक भूमिमे बसैत छी जतेक,
स्वार्थ केर पङ्कमे धसैत छी ततेक,
गाल बजयबाक हेतु दक्ष छी एतेक,
देश हेतु काज से करैत छी कतेक?
धर्म-कर्म पाछु गेल आगाँ अछि पेट,
छी कटैत ताहि लय समाज केर घेँट,
राखल चौपेति फूसि केर सात गेँट,
सपनोमे होइछ किन्तु सत्यसँ ने भेट।
माटिकेर मोलकेँ चिन्हैछ जे समाज,
राखियो सकैछ सैह देशकेर लाज,
माटिकेँ चिन्हाउ छोड़ि आइ आन काज,
तोड़ि-ताड़ि फेकि-फाकि आन साज-बाज।
- पुस्तक : चन्द्रनाथमिश्र ‘अमर’ रचना संचयन (पृष्ठ 389)
- संपादक : योगानन्द झा, शम्भुनाथ झा, विजयदेव झा
- रचनाकार : चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’
- प्रकाशन : साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली
- संस्करण : 2025
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