दर्शन

अजंता देव

दर्शन

अजंता देव

और अधिकअजंता देव

    मुझे कभी नहीं दीखता

    अपना असली चेहरा

    वह चेहरा

    जो दूसरे देखते हैं।

    मुझे हर बार सहारा लेना पड़ता है

    आईने का

    और जब आईने के सामने होती हूँ

    तब मेरा चेहरा होता है

    तनावरहित

    ख़ुशमिज़ाज

    प्रसाधनों से दमकता

    मुझे कभी पता नहीं चलेगा

    ग़ुस्से और नफ़रत से जलती आँखों का

    नींद में ढलके होठों का

    खाते समय फूलते-पिचकते गालों का

    प्रियजनों के बीच छलकते अनुराग का

    बहुत पहले

    मेरे जन्म पर

    लोगों ने देखा था मेरा चेहरा पहली बार

    ऐसे ही किसी दिन

    रुख़्सती होगी पृथ्वी से

    तब भी

    शोकगीतों के बीच

    लोग ही करेंगे मेरा अंतिम दर्शन

    स्रोत :
    • पुस्तक : राख का क़िला (पृष्ठ 80)
    • रचनाकार : अजंता देव
    • प्रकाशन : वाग्देवी प्रकाशन
    • संस्करण : 2002

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