की कहू भाइ हम, दलित टोलाक दशा
एहि टोलामे सदिखन करैत अछि
लोक ताड़ी-दारू पीबिक' तमाशा
भूख-गरीबी-बेमारीसँ ककरो ठीक नहि अछि
देहक दशा
नान्हि-नान्हि छौड़ा सभ करैत रहैत अछि
गाजा-भांगक नशा
आ नहि कियो जाइत अछि इसकुल
सभके सभ रहैत अछि गोली-कौड़ी खेलाइमे मशगुल
कहल जाइत छैक—घर बाल-बुतरुक
पहिल पाठशाला होइत छैक
एहि टोलामे राति-दिन गारि-गिन्जन
मारि-पीट, हल्ला-गुल्ला होइत छैक
कतयसँ अओतैक बाल-बच्चामे नीक संस्कार
जखनकि अभिवावक सभ स्वयं रहैत अछि
किदनि खोलिक' नाचय लेल तैयार
आ हम दलित कवि चिंतित रहैत छी
कोना हैत हमरा समाजक उद्धार
नशा, अशिक्षा, अंधविश्वाससँ एखनो अछि
ई टोल अन्हार मसान
बाबा भीमराव आम्बेडकरक सिद्धांतसँ अनजान
नहि कियो पढ़ैत अछि
सभ अपनेमे लड़ैत अछि
आ संघर्ष की करत कपार...
राति-दिन नशासँ बेहोश पड़ल रहैत अछि
डोमसँ चमार छुआएत अछि
आ चमारसँ मुसहर
आ मुसहरसँ धोबी-दुसाध
अदौ कालसँ एखन धरि
उघैत आबि रहल अछि दोसराक देलहा
पाखंड, आडम्बर, अंधविश्वास
एहना स्थितिमे कोना हेतैक
दलित सभक विकास
मुदा दोख ककर, सरकारक
नहि, एकदम नहि
आजादीसँ एखन धरि कमोबेस हरेक सरकार
करय चाहलक दलितक उत्थान
मुदा स्वयं दलिते नहि चाहैत अछि
अपन कल्याण
आ ने पढ़ल-लिखल दलित
अपन समाजपर दैत अछि धिआन
आरक्षणक बलपर जखन किछु दलित
क' लैत अछि सरकारी चाकरी
तखन नहि बुझैत अछि
अपन दलित भाइक लचारी
ओ अपनाकेँ मानय लगैत अछि पैघ विद्वान
आ एहि घमंडमे आबि
दलित टोलासँ अलग भ' बना लैत अछि
अपन मकाम
सच्च पूछी त' एहने बइमान सभक चलते
दलित टोला अछि एखनो अन्हार मसान।
- पुस्तक : प्रतिकार एखन बाँकी अछि (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 66)
- रचनाकार : रामकृष्ण परार्थी
- प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
- संस्करण : 2022
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