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द मूविंग मैन

da muving main

अनुवाद : शायक आलोक

एडवर्ड फ़ील्ड

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द मूविंग मैन

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    वह एक गठीला, घुँघराले सुनहरे बालों वाला वानर-जैसा आदमी था,

    जिसके पास सामान ढोने वाली एक बड़ी वैन थी

    और कुछ जवान मददगार लड़के

    जिन्हें वह काम के हिसाब से मज़दूरी देता था।

     

    उन लड़कों के साथ उसका व्यवहार

    किसी हरम के मालिक जैसा था

    उसे जब इच्छा होती,

    उनमें से किसी एक को वह अपने सुख के लिए चुन लेता।

    वह उन सबको कुश्ती में हरा चुका था

    क्योंकि जब वे उसके भारी वज़न के नीचे दब जाते

    उसका विशाल शरीर उन पर छा जाता

    तो उन पर एक स्वप्निल-सी कामना उतर आती

    और वे उसे होने देते।

     

    उसे आदर्श मानकर

    वे भी एक शोरगुली टोली बन गए थे—

    गैरेज के सामने बने दफ़्तर के आसपास मँडराते

    किसी काम की पुकार की प्रतीक्षा करते हुए

    हर समय कुश्ती करते

    एक-दूसरे को पकड़ते-धकियाते

    लेकिन एक आँख हमेशा अपने मालिक की स्वीकृति पर लगी रहती।

     

    वे अपनी दुबली, काम से तराशी हुई मांसल देहों से

    उसे आधा छेड़ते रहते

    पीछे अँधेरे में वैन खड़ी रहती

    उसका पिछला फाटक खुला हुआ
    अंदर लगभग ख़ाली

    सिर्फ़ वे रज़ाइयाँ और गद्देदार चादरें

    जिनसे फ़र्नीचर लपेटा जाता था

    एक ढेर में पड़ी हुईं।

     

    दुपहर की सुस्ती में

    मालिक किसी लड़के के साथ मस्ती शुरू कर देता,

    शायद किसी ऐसे के साथ

    जो कुछ ज़्यादा ही चंचल रहा हो

    वह उसे गैरेज़ के अँधेरे में दौड़ाता,

    और पीछा करते-करते

    सीधे वैन के भीतर धकेल देता।

    फिर वे दोनों उन रज़ाइयों पर लुढ़कते हुए गिरते,

    यहाँ तक कि वह आदमी

    अपनी छाती के नीचे उसे दबोच लेता,

    और लड़के की पतलून नीचे खींच देता

    जबकि उसकी अपनी पतलून तो हमेशा खुली ही रहती थी

    उसकी बड़ी, भारी हथेली

    नंगे पेट पर उतरती,

    नीचे बालों के झुरमुट तक,

    खड़े, कठोर लिंग तक—

    अंडकोश सहित, एक मुट्ठी भर—

    लड़का चीख़ उठता,

    लेकिन उसे वहीं रहना पड़ता।

     

    उसके पहलवानी हाथ

    किसी जंगली जानवर की तरह झपट्टा मारते हैं

    और उस युवा देह को कुचलते हुए

    अपनी गिरफ़्त में जकड़ लेते हैं

    वह उसे उलट कर

    अपनी छाती से बाँध लेता है 

    अपना लिंग उसकी जाँघों के पीछे सरकाता,

    नितंबों के उभरे दलों को अँधेरे में टटोलता

    नम जगह की तलाश में

    बार-बार धकेलता रहा।

     

    एक हाथ छाती पर कुचाग्रों को ऐंठते हुए 

    दूसरे हाथ ने उसे नीचे अपनी ओर खींच लिया

    उसके भीतर प्रवेश की चाह में।

     

    अपने मुँह से लड़के की गर्दन पर दंतक्षत देता हुआ

    उसके अलूचा गालों पर उसने ज़ोर-ज़ोर से साँसे लीं,

    उसकी दाढ़ी की खुरदरी चुभन महसूस हो रही थी

    जब वह लड़के के कान में गुर्राते हुए 

    उसे सुख के पहले कच्चे पाठ का अनुभव करा रहा था।

     

    अब वह लड़का पूरा का पूरा

    जब उसकी बाँहों के आग़ोश में था

    उस आदमी का मोटा लिंग उन गोल नितंबों के बीच प्रवेशित हो रहा था

    जब तक कि वह लड़का, उस प्यार भरे

    विशालकाय पुरुष के आग़ोश में पूरी तरह डूबकर,

    एक आह के साथ ढीला न पड़ गया और खुल गया,

    वह पुरुष धीरे-धीरे अपने लिंग के साथ पूरी तरह अंदर प्रवेशित हो गया।

    स्रोत :
    • रचनाकार : एडवर्ड फ़ील्ड
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित

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