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छत्रपति शिवाजी

chhatrapti shivaji

संदीप द्विवेदी

संदीप द्विवेदी

छत्रपति शिवाजी

संदीप द्विवेदी

और अधिकसंदीप द्विवेदी

    धन्य हो माँ तुम धन्य मराठा

    धन्य मराठी माटी रे

    तेरे लाल के दम पर गदगद,

    हुई धरा की छाती रे।

    मातृभूमि के लिए लड़े वो

    मातृभूमि के प्यारे

    माँ और गुरु के संदेशों को

    सदा माथ पर धारे

    नहीं सहा अन्याय किसी का

    न्याय की राह लुभाती रे।

    तेरे लाल के दम पर गदगद,

    हुई धरा की छाती रे।

    उतरे जो तलवार लिए,

    दुश्मन की रूहें थर्राएँ

    टूट पड़े ऐसे दहाड़ कर

    जैसे सिंह बहक जाए

    वो सत्ताएँ उलट गईं जो

    सब को रही सताती रे।

    तेरे लाल के दम पर गदगद,

    हुई धरा की छाती रे।

    हो स्त्री वो दुश्मन की भी

    माँ का दर्जा होता है

    वीर शिवाजी के आंगन में

    चैन से बच्चा सोता है

    जीजा तेरे लाल का क़िस्सा

    हर एक लोरी गाती रे।

    तेरे लाल के दम पर गदगद,

    हुई धरा की छाती रे।

    सहते कहाँ ग़ुलामी बोलो

    शौर्य, तेज़ और साहस

    कर स्वराज का शंखनाद

    चल उठा वीरवर नायक

    रंग डाला हर किला केसरिया

    रखी मान की थाती रे।

    तेरे लाल के दम पर गदगद,

    हुई धरा की छाती रे।

    स्रोत :
    • रचनाकार : संदीप द्विवेदी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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