Font by Mehr Nastaliq Web

चरवाहे

charwahe

चरवाहे बन सकते हैं शहंशाह

शहंशाह बन नहीं सकता चरवाहा चाहकर भी

तानाशाह बन सकता है वह

भोला-भाला व्यक्ति

बन सकता है पंडित ज्ञानी विराट

ज्ञानी हो नहीं सकता मूर्ख

पागल हो सकता है वह

आकाश छूती ज़मीन को

पाट सकते हो अट्टालिकाओं से

खींच सकते हो

कई-कई और चीन की दीवार

उसे बदल नहीं सकते समतल भूमि में

खँडहर बना सकते हो

वहाँ बोलेंगे उल्लू।

स्रोत :
  • रचनाकार : कुमार मुकुल
  • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

संबंधित विषय

Additional information available

Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

OKAY

About this sher

Close

rare Unpublished content

This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

OKAY