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बृहस्पतिवार की रात

brihaspativar ki raat

एवॉ तोथ

अन्य

अन्य

एवॉ तोथ

बृहस्पतिवार की रात

एवॉ तोथ

और अधिकएवॉ तोथ

    उस दशा में मेरे कम-हिम्मत सँगाती

    गैस खोल लेते हैं

    या कूद पड़ते हैं आठवें माले से

    और कुछ नहीं तो जा सोते हैं

    जो टकरा जाए उसी

    औरत के साथ—

    और जो ज़नाना हैं

    नुक्कड़ पर टहलते सिपाही के साथ—

    आत्मपीड़क चीर लेता है अपनी कलाई

    रोगों का वहमी

    नींद की दो बोतल गोली खा लेता है

    परपीड़क लिखता है पत्र

    सबको बताता कि

    कौन है इस सबका गुनहगार

    मैं आँखे खोले अँधेरे में लेट कर

    करती हूँ प्रतीक्षा कि सूर्योदय होगा

    जो है निस्तार एकमात्र

    मेरे जैसे सब निपट अपात्रों का।

    स्रोत :
    • पुस्तक : दस आधुनिक हंगारी कवि (पृष्ठ 124)
    • रचनाकार : कवि के साथ अनुवादक गिरधर राठी, मारगित कोवैश
    • प्रकाशन : वाग्देवी प्रकाशन
    • संस्करण : 2008

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