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बॉडी काउंट

bauDi kaunt

शिवांगी गोयल

शिवांगी गोयल

बॉडी काउंट

शिवांगी गोयल

और अधिकशिवांगी गोयल

    मेरा प्रेम ख़ून की तरह बहा

    जाँघों के बीच से, चादर तकिए भिगोता हुआ

    सफ़ेद ज़मीन को लाल करता हुआ

    तुम्हारी उँगलियों के बीच से रिसता गया

    रात की सबसे सुंदर याद की तरह

    तुम्हें प्रेम चाहिए था, देने की क़ाबिलियत से कोसों दूर

    मुझे प्रेम देना आता था—नदी की तरह, मैं प्रेम देती गई

    ख़ून की तरह, मैंने जाने कितने यूनिट प्रेम दिया

    तुम्हारा नाम उसके नाम से इतना अलग क्यों है

    तुम तो बिल्कुल उसके जैसे हो

    मैंने तुम दोनों को चाहा, तुम दोनों ने मेरे शरीर को

    मेरे प्रेम का बहता ज़रिया बस मेरा बदन ही तो बना

    क्या नया हुआ?

    मेरा प्रेम फिर ख़ून की तरह बहा

    कितना डरावना है एक इंसान के लिए

    ‘बॉडी काउंट’ में तब्दील हो जाना

    उसकी सारी छुअन, सारी स्मृतियों, संसर्गों का

    एक गिनती में सिमट जाना

    तुम्हारे हाथ मेरी योनि से निकले ख़ून से पहली दफ़ा लाल हुए थे

    मैंने तुम्हारे हाथ आश्चर्य से छुए थे, ख़ुद को महसूस किया था

    और तुमने मुझे एक गिनती में समेटकर कहा

    ‘मेरा बॉडी काउंट अब सात हो गया’

    मेरा प्रेम फिर ख़ून की तरह बहा

    स्रोत :
    • रचनाकार : शिवांगी गोयल
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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