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बिटिया लिक्खइ नई कहानी

bitiya likkhai nai kahani

मोहनलाल यादव

मोहनलाल यादव

बिटिया लिक्खइ नई कहानी

मोहनलाल यादव

और अधिकमोहनलाल यादव

    अबला अउर लचार जाना बिटिया तऽ मरदानी

    नित्य नया इतिहास रचइ अउर लिक्खइ नई कहानी।

    अम्मा के सुख दुख के साथी ममता प्रेम सँजोवइ

    बाबा के जब नींद आवइ खुदउ रात सोवइ,

    भइया खेत से लउटि के आवइ धावइ लइके पानी

    नित्य नया इतिहास रचइ अउर लिक्खइ नई कहानी।

    झर झर फूल झरइ होंठन से जब बिटिया मुसकाइ

    जब रोवइ तउ नैन सीप से मोती झरि झरि जाइ,

    बाबा के बगिया में महकइ जइसे रात की रानी के

    नित्य नया इतिहास रचइ अउर लिक्खइ नई कहानी।

    जीवन के अन्हियारे पथ पे नई रोसनी लाई

    सागर की गहराई नापइ नभ के छुवइ ऊँचाई,

    अंतरिच्छ में झंडा गाड़इ बिटिया बड़ी सयानी।

    नित्य नया इतिहास रचइ अउर लिक्खर नई कहानी।

    जब जब दुस्मन आँख देखावइ मोर्चा तुरत सम्हारइ

    रणचंडी बन जाइ समर में बन सेरनी दहाड़इ,

    आन बान पे जूझइ बिटिया बन झाँसी की रानी

    नित्य नया इतिहास रचइ अउर लिक्खइ नई कहानी।

    नहीं भेद बिटिया बेटवा मा झूठा भरम मिटावा

    देस समाज के उन्नति चाहा बिटिया खूब पढ़ावा,

    निर्मल पावन बिटिया जइसे गंग जमुन के पानी

    नित्य नया इतिहास रचइ अउर लिक्खइ नई कहानी।

    कोढ़ घिनौना भा समाज के दैजा अउर दहेज

    राह पतन के छोड़ि द्या बाबू तनिक करा परहेज,

    दैजा से सम्मान बाढ़ी छोड़ा लीक पुरानी

    नित्य नया इतिहास रचइ अउर लिक्खड़ नई कहानी।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अलगौझी (पृष्ठ 49)
    • रचनाकार : मोहनलाल यादव
    • प्रकाशन : हंस प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2023

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