Font by Mehr Nastaliq Web

बिटिया के जनमे रोवाई

bitiya ke janme rovai

मोहनलाल यादव

मोहनलाल यादव

बिटिया के जनमे रोवाई

मोहनलाल यादव

और अधिकमोहनलाल यादव

    बेटवा के जनमे सोहरवा गवाइ रहे

    बिटिया के जनमे रोवाई हो बपइआ।

    भइया खाइ दूध रबड़ी मलाई खुब

    हमइ सूखी रोटिया खिआई हो बपइआ।

    भइया के दिह्या बाबा महला दुमहला हो

    हमके दिह्या बहिआई हो बपइआ।

    गइया भइंसि जस किमतिया लगाई मोरा

    दिहल्या कसइया के थमाई हो बपइआ।

    अँखिया के दु-दुइ बेवहरवा तोहार बाबा

    जियरा गयल पथराई हो बपइआ।

    अँचरा के दुधवा नयनवाँ के पनिया हो

    दिहल्या किमतिया भुलाई हो बपइआ।

    तोहरी पगड़िया के राखी इजतिया हो

    दुइनउ कुल के लजिया बचाईं हो बपइआ।

    एतनेउ पे जियरा जुड़ान नाहीं तोहरा के

    कोखिअइ में दिह्या मरवाई हो बपइआ।

    हाय रे विधाता काहे औरत बनाइ दिह्या

    काहे जनमाइ दिह्या पूत निर्मोहिआ।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अलगौझी (पृष्ठ 90)
    • रचनाकार : मोहनलाल यादव
    • प्रकाशन : हंस प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2023

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY