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बिजूका

bijuka

जब भी उल्लेख करते हैं वे

भगवान तेरा

मुझे याद हो आता है

खेत के बीच में गड़ा बिजूका

झुकी गर्दन

और लटकी बाँहों वाला

अलग-अलग सत्ताओं की

सुरक्षा में गाड़े गए

भगवान!

तू अज्ञान और अंधविश्वासों के

अंधकार में ही देदीप्यमान है

इसलिए

गहरे से गहरा

बना रहे अंधकार

प्रयास रहता है गाड़ने वालों का

ताकि दिखाई दे तू

विराट् एवं सर्वशक्तिमान

और फलती-फूलती रहे

अबाध उनकी सत्ता की फ़सल

तर्क के प्रकाश में

देखा जा सकता है तुझे साफ़-साफ़

बिजूके की तरह झुकी गर्दन

और लटकी बाँहों-सा

स्रोत :
  • पुस्तक : दूसरा युवा द्वादश (पृष्ठ 174)
  • संपादक : निरंजन श्रोत्रिय
  • रचनाकार : महेश चंद्र पुनेठा
  • प्रकाशन : बोधि प्रकाशन
  • संस्करण : 2013

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