भेड़िया के जबड़े हमारे दिलों में
bheDiya ke jabDe hamare dilon mein
मर्को मगर्शेविच
Mirko Magarsevic
भेड़िया के जबड़े हमारे दिलों में
bheDiya ke jabDe hamare dilon mein
Mirko Magarsevic
मर्को मगर्शेविच
और अधिकमर्को मगर्शेविच
पीठ-पीछे
बहुत दूर से
भेड़िया के जबड़े हमारे दिलों में
हाहाकार मचाए हैं।
आइनों से मुख़ातिब
हम अपनी ख़ुशमिज़ाज मुस्कानें सवाँरते हैं
दाँतों में फँसी रह गई
जन्मजात जिघांसा को खुरचते हुए।
ताक़त की शान से हमें नफ़रत है
ईर्ष्याभाव से जो दिवसों को छेद-छेद
मोतियों की माला की भाँति
सजाती जाती है भेड़िया के चौड़ाते सीने पर।
हममें से हर एक का यक़ीन है
कि उसके सीने से सबसे अच्छी आवाज़ें निकलती है
और काला ख़ून अपनी स्वाभाविक गति से प्रवाहित है
लेकिन वहाँ, एक स्वाभिमानी दिल की जगह
एक ठिठुरता बौना
रींगता है ख़ौफ़ के दुस्तर चरागाहों के
फूल तहस-नहस करता हुआ।
हमें भूल जाना चाहिए कि
हम आखेट किए गए भेड़िये हैं
जिनकी पसलियाँ जनमते ही टूट गई थीं।
हमारे सपने अधिक शांतिप्रद होंगे।
- पुस्तक : रोशनी की खिड़कियाँ (पृष्ठ 476)
- रचनाकार : मर्को मगर्शेविच
- प्रकाशन : मेधा बुक्स
- संस्करण : 2003
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