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भैया, अब हमके नैहरवा ना भावे

bhaiya, ab hamke naiharva na bhave

विशाल कुमार

विशाल कुमार

भैया, अब हमके नैहरवा ना भावे

विशाल कुमार

और अधिकविशाल कुमार

    भैया, अब हमके नैहरवा ना भावे,

    जहाँ जन्म भईल, जहाँ के माटी में खेलनी

    उहे घरवा अब हमके काटे।

    केने जाई, केकरा के दुख सुनाई

    पियवा हमार भइले निरमोहिया

    छुड़ा देले हमसे सब सनेहिया ,

    दिखे ना कौनो रहिया, भईल अंधेरिया

    रहलेम, सही सास गोतनी के जार ,

    खाई लेहम पियवा के मार

    लेकिन सहल ना जाला‌ नैहरवा के दुखवा

    माइयो अब हमके‌ कुलक्षिणी कहे,

    बाबूओ अब आँख दिखावे‌,

    भौजी भईली निर्दयी कहे खाई ले माहुर

    भैया, अब हमके नैहरवा ना भावे‌।

    सिंदूर पडते छूटल घर से हमार नाता,

    बाबू समझले की बोझ उतरल,

    लेकिन फेर बोझ लदा गोइल कपारे!

    फेर गोइनी उहे‌ दुआरे

    कइसे निकली हम बहरिया, कौन मुहवा दिखाई

    माई कहे होता भर समाज में जग हसाईं।

    भैया, कौन हमरे दोष

    नौकरानी बनी खटनी, सबके बात सहनी

    मन मारी दुख जार सहनी, तबो पिया भइले निरमोहिया

    नीमक रोटी ससुरा के ठीक, हमके नैहरवा के घी ना भावे

    माई बाबू आपन ना लागे, भईले कसइया!

    चूल्हा पे अपना के झोकनी,

    बननी हम नौकरनिया

    पियवा से कुछ ना मंगनी, बस मंगनी ओकर छाया

    लेकिन पियवा भईल निरमोहिया, हम कैसे छोड़ी माया

    के पूछी हमरा, भइनी‌ हम लाचार हो।

    भैया, अब हमके नैहरवा ना भावे

    भले पियवा मार दे जान से

    ख़ुशी-ख़ुशी मर जाइम

    डोली उठल घर से,

    अर्थी शोभे ससुरा से।

    स्रोत :
    • रचनाकार : विशाल कुमार
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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