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बात

baat

अनुवाद : श्यौराजसिंह जैन

ल्यूबो बीजनैर

और अधिकल्यूबो बीजनैर

    मृदुल, अनुरागी शांति तैरती हृदयों में

    और कितनी आत्माएँ अस्त होने की प्रतीक्षा में

    शुभ्र मठ स्वप्नमग्न पर्वत पर,

    मौन की आभा दहकती नभ की अनल में।

    तीव्रगामी चमगादड़ अब चल पड़ेगा,

    साँझ चमक उठेगी नीली और ऊषा-सी।

    गिरजों के आँगनों में भँवर लपटों का,

    गिरजों के आँगनों में जलते पवित्र भुवन।

    शांत पथ के किनारे, साँस दबाकर,

    अधसोई गुज़र गई कोई नारी।

    —क्या खोजती हो, बहिन? इधर से तो समय जाता।

    —गिरजों के आँगनों को जोहता कोई, जोहता।

    और देखा, कहाँ उसके पीले चेहरे पीले होते।

    और देखा, कहाँ उसके काले केश भूरे होते।

    स्रोत :
    • पुस्तक : समकालीन यूगोस्लाव कविता-1 (पृष्ठ 26)
    • रचनाकार : ल्यूबो बीजनैर
    • प्रकाशन : ज़ाग्रेब, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1978

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