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अरुणोदय

arunoday

आरसी प्रसाद सिंह

और अधिकआरसी प्रसाद सिंह

    (1)

    किरण-शरसँ बेधि देलक

    प्राण-मन के आइ प्राते?

    चहचहा सय-सय उठल

    आशा-विहंगम-गण हठाते!

    एक नव ऊष्मा रुधिरमे

    सुगबुगाहटि भरि रहल अछि!

    आणविक ऊर्जा-जकाँ

    सन-सन हृदयमे बरि रहल अछि!

    लिखि रहल अछि कनक

    कूचीसँ कथा के पात-पाते?

    किरण-शरसँ बेधि देलक

    प्राण-मन के आइ प्राते?

    (2)

    आइ प्राते करऽ लागल

    अछि मनोरथ-भ्रमर गुंजन!

    मोर-मन नाचऽ हमर

    लागल अकारण घेरि आंगन।

    शीतसँ भयभीत छल जे

    प्राण शीतल भेल सुटकल,

    आइ खंजन-खग जकाँ

    सर्वत्र ठुमकै अछि विचंचल!

    भेल अछि उन्मुक्त जीवन

    तोड़ि कऽ आलस्य बन्धन!

    आइ प्राते करऽ लागल अछि

    मनोरथ-भ्रमर गुंजन!

    (3)

    साप जे सूतल उमंगक

    छल पतालक हिम-विवरमे,

    आइ से फण काढ़ि भेल अछि

    ठाढ़ अरुणोदय-प्रहरमे।

    अश्रु-कण जे किछु ढरल छल

    विरहिणी रजनी-नयनसँ,

    आइ मोती बनि रहल अछि

    जगमगा अभिनव किरणसँ।

    कऽ रहल फूत्कार अछि

    विष वारुणी उच्छ्वास-स्वरमे।

    साप जे सूतल उमंगक

    छल पतालक हिम-विवरमे।

    (4)

    आइ ने किछु होश हमरा,

    आइ ने अछि प्राण बसमे।

    आइ डूबल अछि जिलेंबी—

    मन हमर सम्पूर्ण रसमे।

    पयर बहकै अछि हमर जे

    बाटमे, से कोन मस्ती?

    मनक मधुमाछी बसल,

    बैसल, बसा कऽ स्नेह-बस्ती।

    कोन विद्युत धार अभिनव

    बहि रहल अछि आइ नसमे?

    आइ ने किछु होश हमरा,

    आइ ने अछि प्राण बस।

    (5)

    कोकिला सन्देश मिलनक

    दऽ रहल अछि आम्र-वनसँ

    जन्म-जन्मक चेतना

    कौतुक करै अछि ऐक क्षणसँ!

    जे कमल-मुख म्लान पालासँ

    पड़ल छल भेल कारी।

    आइ हँसि-हँसि सुरभि लुटबै

    अछि सरस कानन-विहारी!

    हृदय-वातायन हमर

    गमकैत अछि दक्षिण पवनसँ।

    कोकिला सन्देश मिलनक

    दऽ रहल अछि आम्र-वनसँ

    स्रोत :
    • पुस्तक : सूर्यमुखी (पृष्ठ 4)
    • रचनाकार : आरसी प्रसाद सिंह
    • प्रकाशन : मैथिली अकादमी, पटना
    • संस्करण : 2011

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