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अंत्येष्टि के समय

antyeshti ke samay

अनुवाद : सुरेश सलिल

डेनिस ब्रूटस

डेनिस ब्रूटस

अंत्येष्टि के समय

डेनिस ब्रूटस

और अधिकडेनिस ब्रूटस

    सूर्यास्त के वक़्त काले, हरे और सुनहरे रंगों का तामझाम

    और शाश्वतत्व की आशाएँ सँजोए खूँटीदार क़ब्रे,

    वधुओं और भक्तिनों वाली शुभ्र ओढ़नियों में

    लाल-अंगूरी कोटों की अपनी उदारता को

    भावुकता में तब्दील करती नसें—

    शोक संगीत में डूबी ढलानों को निरर्थकता से भरती हुई।

    सलामी दो! और फिर उस खोखले कवच के बारे में सोचो :

    उस आदमी के लिए, जिसके उपहारों को

    यह ग़लाज़त निगल जाती है—हमारी उम्मीदों के साथ।

    अरे, समस्त पराजित लोगो,

    सारी शक्ति मिट्टी हो गई—व्यर्थ कर दी गई

    मृत्यु के द्वारा नहीं—

    जन्म के साथ मत्थे मढ़ दी गई

    पहचान पुस्तिकाओं के द्वारा।

    उठो, आज़ादी का ढीठ कोलाहल हमारी धरती को झकझोर रहा है

    मृत्यु नहीं, बल्कि मृत्यु की अनी, निरंकुशता,

    हमारे आधार को काटती है और

    पीड़ा, पराजय, अभाव की हमारी तंग कोठरियों का

    षड्यंत्र रचती है।

    बेहतर होगा हमारे लिए

    पैरों के बल रींगने के बजाय

    ज़िंदगी क़ुर्बान कर देना।

    स्रोत :
    • पुस्तक : रोशनी की खिड़कियाँ (पृष्ठ 342)
    • रचनाकार : डेनिस ब्रूटस
    • प्रकाशन : मेधा बुक्स
    • संस्करण : 2003

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