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अंतिम बार

antim bar

पायल भारद्वाज

अन्य

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पायल भारद्वाज

अंतिम बार

पायल भारद्वाज

और अधिकपायल भारद्वाज

    तुम्हें कस लूँ अपने बाहुपाश में

    अंकित कर दूँ अपने संपूर्ण प्रेम से तृप्त एक चुंबन

    तुम्हारी पेशानी पर

    तुम्हारी आँखों के इन लाल डोरों में पढ़ लूँ प्रेम के सर्वस्व ग्रंथ

    अपनी साँसों में तुम्हारी साँसों की मादक सुगंध भरकर

    समेट लूँ सारी स्मृतियाँ अपने भीतर

    इहलोक और परलोक के लिए

    अंतिम बार

    यही सोचती हूँ हर बार जाने से पहले

    परंतु वह अंतिम प्रणय क्षण बन जाता है प्रथम प्रणय

    प्रत्येक बार

    और फिर मेरे निर्णय की हार कहूँ अथवा प्रेम विजय

    कि जड़ हो जाते हैं मेरे क़दम

    और मैं जा ही नहीं पाती।

    स्रोत :
    • रचनाकार : पायल भारद्वाज
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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