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अन्हरजाली

anharjali

रघुनाथ मुखिया

रघुनाथ मुखिया

अन्हरजाली

रघुनाथ मुखिया

और अधिकरघुनाथ मुखिया

    जखन भूमण्डलीकरणक

    होअय लागलै प्रवेश

    तखन ने ढोल बाजलै, ने डम्फ

    ने मृदंग, ने तुरही, ने पिपही

    ने शंखनादे भेलै

    ने डंके पर पड़लै चोट

    ने कोनो ज्वालामुखीक गह्वरमे

    छागरक बलिप्रदाने भेलै

    आ, ने कोनो शिवालयसँ एलै

    नचारीक राग

    ने कोनो मस्जिदमे

    पढ़ल गेलै अजान

    आ, ने कोनो चर्चेमे भेलै 'प्रेय'

    ने कोनो गुरुद्वारासँ एलै

    नानकक सबद

    ने कोनो कबिराहा उचारलनि

    कबीरक साखी

    ने धरती डोललै

    ने अकासे गरजलै

    ने छिटकलै बिजुरी

    ने खसलै ठनका

    तेहेन सनक कोनो घटना नहि घटलै

    भूमण्डलीकरणक प्रवेशक समय

    जाहिसँ मचि जेतियै खलबल्ली

    बस अपनहि बदलि गेलै

    जेना बदलि जाइए

    दिन, तारीख, समय...

    बस तहिना

    स्वयं बदलल जा रहलैए

    मनुक्ख! मनुक्खक स्वभाव

    ओकर सोच-विचार, चालि-चलन

    आहार-व्यवहार, लोक-लक्षण...

    जेना बदलि गेलैए गाम

    गामक टोल-टापर, टाट-फरक

    घर, घरक देहरि, ओसार, ओलती, मोखा, चिनबार

    रस्ता-पेड़ा, गल्ली-कुच्ची

    गाछ-बिरीछ, लत्ती-फत्ती

    बाड़ी-झाड़ीक तीमन-तरकारी

    घर-आँगनक सीमा-सरहद

    लहलहाइत एकल परिवारक

    संकीर्णताक अन्हजाली

    गछारने जा रहलैए

    मनुक्खक डेन-पाँखुर, मोन-मिजाज

    तेँ बदलि गेलै आब

    व्यक्ति, परिवार समाजक परिभाषा

    आब कतबो सम्हरब

    सम्हरल ने हएत

    बरू लगाउ अहाँ सोंगर

    तँ धम्मसँ खसब

    भाइ एहि देशक बसातेमे

    तेना कऽ भरि देल गेलैए

    कारपोरेट जगतक बतरसाह रसायन

    आ, कानमे फूकि देल गेलै

    आर्थिक सुधारक मंत्र जे

    सभ किओ इन्टरनेट पर

    सर्च करय लागलै

    कुबेर भण्डारक अता-पता

    पहिरय लागलै

    आठ-दस गोट जेबी बला फुलपैंट

    किछु-किछु अंशक शेयरधारी बनि

    भण्डारकेँ लुटबाक लेल

    होअय लागलै ग्लोबलाइज्ड

    वएह बतरसाह रसायनक

    एकगोट बुन्न

    हमरा संस्कृतियोक काजरपर

    एनाकेँ खसायल गेलै जे

    काजर लेभरिकऽ

    कारीख सन देखार दिअऽ लागलै

    ओहि बहकल कारीखकेँ

    चून लेपि झँपबाक प्रयाससँ

    अभरलै एकटा नवका दृश्य

    'सांस्कृतिक कार्टून'

    परिणाम भेलै जे

    आब कारीख चून दुनू

    झकझक देखार पड़य लागलैए

    जखन वैश्वीकरणक चपेटमे

    धड़ामसँ खसैए सूचकांक

    हाथमे अबैत छनि फुटलाहा बाटी

    माँति कऽ भऽ जाइ लै बताह

    एकदम्म निछच्छ बताह।

    स्रोत :
    • पुस्तक : झुझुआन होइत गाम (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 98)
    • रचनाकार : रघुनाथ मुखिया
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2018

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