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ऐरोबिक्स करती महिलाएँ

airobiks karti mahilayen

पूनम शुक्ला

पूनम शुक्ला

ऐरोबिक्स करती महिलाएँ

पूनम शुक्ला

और अधिकपूनम शुक्ला

    अपने सारे दुख दर्द पीछे छोड़तीं हुई

    अपनी व्यस्त दिनचर्या से

    थोड़ा-सा वक्त अपनी मुट्ठियों में भींचे

    वे आती हैं यहाँ

    संगीत की ताल पर थिरकने

    रूखे बाल, सूखे हुए चेहरे

    जकड़ी हुई देह

    दर्द करते टखनें,बाँहें

    और बरसों से झुकी हुई रीढ़ लिए

    वे यहाँ करतीं हैं

    ऐरोबिक्स एक व्यायाम

    एक थिरकता नृत्य

    कुछ खास निर्देशों के साथ

    इस नृत्य के साथ

    जगती हैं उनकी कोशिकाएँ

    जो आधी सुप्त अवस्था में

    उनींदी पड़ी हैं जाने कब से

    वे यहाँ भरती हैं अपने निर्बल देह में

    थोड़ी-सी ताक़त,थोड़ी-सी हिम्मत

    थोड़ा-सा अल्हड़पन,थोड़ा-सा लड़कपन,

    थोड़ी-सी हँसी, थोड़ी-सी ख़ुशी

    थोड़ी-सी लचक, थोड़ा-सा रूप

    थोड़ी-सी रोशनी, थोड़ी-सी धूप

    रंग-बिरंगे वस्त्रों में नृत्य करतीं हुईं

    वे दिखती हैं किसी बाग में खिले फूलों-सी

    पर सात दिनों में एक दिन

    वे सभी पहनेंगी एक साथ रंग पीला

    और अपने जीवन के अँधकार को परास्त करती हुईं

    दिखेंगी बिल्कुल कनेर-सी

    मामूली लेकिन बेहद ख़ास।

    स्रोत :
    • रचनाकार : पूनम शुक्ला
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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