अगर कभी मैं मरा—लेकिन यह जल्दी होगा
agar kabhi main mara—lekin ye jaldi hoga
अहमद मुहम्मद इमामोविच
Ahmed Muhamed Imamovic
अगर कभी मैं मरा—लेकिन यह जल्दी होगा
agar kabhi main mara—lekin ye jaldi hoga
Ahmed Muhamed Imamovic
अहमद मुहम्मद इमामोविच
और अधिकअहमद मुहम्मद इमामोविच
तथ्य सही नहीं हैं।
ट्रेनें अब विलंबित बिल्कुल नहीं हैं
किंतु अब उन्होंने पूरी तरह बंद कर दिया है आना
और रेल के डिब्बे, पटरियाँ और कंडक्टर
अब क़तई किसी इस्तेमाल के नहीं रहे।
कुछ पेशे डाइनासोरों की तरह लुप्त हो रहे हैं।
पागलख़ाने की मरम्मत हो रही है
और उनका ख़ासा विस्तार किया जा रहा है
नई नर्सों की भर्ती हो रही है
और बहुत अनुभवी तालासाज व वेल्डर
खिड़कियों पर बहुत मोटी सलाख़ें जड़ रहे हैं—
वहाँ, इधर-उधर लुढ़कती-पड़ती खोखली खोपड़ियों के गमलों में
फूल शोभायमान हैं, जबकि दिमाग़
किसी भी क़िस्म की हिफ़ाज़त के बिना
लंबे-चौड़े हाल में इधर से उधर मारे-मारे डोल रहे हैं,
मैं गुलाब के ताज़ा फूलों का गुलदस्ता लिए
उपेक्षित जंगलों में भटक रहा हूँ और पाता हूँ
कि सबसे नज़दीकी दोस्त वहाँ दरख़्तों की शाख़ों
पर कुदरती पनाहगाहों में हैं वन्य जीवों और परिंदों के बीच।
बबूना के फूल और बनमेथी
मेरी बलाएँ ले रही हैं
मुझे चूम रही हैं।
भालू और भेड़िये
मुख्य शिकारगाह के दरवाज़े पर
पानी उँडेलकर मेरे हाथ धुला रहे हैं।
झरबेरियाँ साहियाँ और गिलहरियाँ
पत्तियों की हरी नेमत और
बेतहाशा तंदुरुस्त चूहों का सुखद सान्निध्य मुहैया कराने के लिए
मेरी अगवानी कर रही हैं।
गोश्त की बोटियाँ और नुची-तुड़ी मुर्ग़ियाँ
एक दुकान की खिड़की से
मेरे लिए रजिस्टर्ड ख़त लिख रही हैं :
सभी वार्डों में आपका स्वागत है,
डॉक्टरों ने एक हज़ार साल के अग्रिम क़रारनामे पर
दस्तख़त कर दिए हैं और ख़ुद बीमार होकर पड़ गए हैं
और मरीजों को बचाने की अपनी ड्यूटी के दौरान ही
मर रहे हैं...
मैं वे ख़त पूरे जंगल में घूम-घूमकर
जंगली बकरों को सुना रहा हूँ।
हाँ, जंगली बकरों को! —
जो काग़ज़ के वर्के
सेब और नाशपाती की
स्वादिष्ट पत्तियों की तरह खाते हैं।
- पुस्तक : रोशनी की खिड़कियाँ (पृष्ठ 468)
- रचनाकार : अहमद मुहम्मद इमामोविच
- प्रकाशन : मेधा बुक्स
- संस्करण : 2003
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