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आदमखोर

adamkhor

गुफरान जीलानी

और अधिकगुफरान जीलानी

    नख-शिख धरि

    नफरतक आगिमे

    झुलसि रहल अछि

    संसारक एक-एकटा अंग

    मुदा

    तइयो हमरा बड्ड सुकून अछि

    किएक तँ

    नफरत एखनो

    अपन चरमपर नहि अछि

    जाहि दिन

    सभटा मानव भऽ जेतै

    आदमखोर

    बजारमे बिकाय लगतै

    मनुक्खक माउस

    जाहि दिन

    हिन्दू किनतै मुसलमानक माउस

    मुसलमान किनतै हिन्दूक माउस

    जाहि दिन

    दलित किनतै ब्रह्मणक माउस

    ब्रह्मण किनतै दलितक माउस

    जाहि दिन

    अफरीकी किनतै अमेरकीक माउस

    अमेरीकी किनतै अफरीकीक माउस

    जाहि दिन

    फिलिस्तीनी किनतै इजराइलीक माउस

    इजराइली किनतै फिलिस्तीनीक माउस

    जाहि दिन

    हिन्दुस्तानी किनतै पाकिस्तानीक माउस

    पाकिस्तानी किनतै हिन्दुस्तानीक माउस

    ताहि दिन

    नफरत अपन चरम पर हेतैक।

    स्रोत :
    • पुस्तक : लाल ओसक बुन्न [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 28)
    • रचनाकार : गुफरान जीलानी
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना
    • संस्करण : 2018

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