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आदमी, स्त्रियाँ और नगर

adami, striyan aur nagar

अनुवाद : श्यौराजसिंह जैन

फ्रानो अल्फ़ोरेविच

फ्रानो अल्फ़ोरेविच

आदमी, स्त्रियाँ और नगर

फ्रानो अल्फ़ोरेविच

और अधिकफ्रानो अल्फ़ोरेविच

    विश्व में बहुत-से आदमी हैं जिनसे अपरिचित रहेंगे;

    भौगोलिक मानचित्र की भाँति जिनका जीवन मौन है,

    और हम मात्र अनुमान लगाते हैं कि वे क्या-क्या दे सकते थे

    अपनी उपस्थिति से जिस तक हम पहुँचेंगे।

    विश्व में बहुत-सी उत्कृष्ट स्त्रियाँ हैं,

    हज़ारों नगरों में, हर नगर में शायद एक,

    जो हमें प्रेम कर सकती, हमारी आकांक्षाओं की छाया,

    पर बिना हमें जाने मर जाएँगे जिसके अधर प्यासे।

    विश्व में बहुत-से नगर हैं, विविध ज्यों मानव-आकृतियाँ,

    कहीं रहता है मनुष्य जो बढ़कर है भाई से या मित्र से

    हमारे ही नगर के, जहाँ संकीर्ण विधि ने

    कर दिया जीवन विषादमय अतृप्त इच्छाओं से।

    विश्व में बहुत-से निकटजन हैं जिनसे अपरिचित रहेंगे,

    और जगहें भी हैं जहाँ हमारा थका मन विश्राम कर लेता,

    पर सन्निकट जीव से रह जाएँगे अपरिचित दुर्भाग्य से,

    विश्व में हैं बहुत-से आदमी, नगर और स्त्रियाँ।

    स्रोत :
    • पुस्तक : समकालीन यूगोस्लाव कविता-1 (पृष्ठ 68)
    • संपादक : श्यौराजसिंह जैन
    • रचनाकार : फ्रानो अल्फ़ोरेविच
    • प्रकाशन : हृवाती लेखक संघ, ज़ाग्रेब
    • संस्करण : 1978

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