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मंज़िल से ऐन पहले के पड़ाव तक

manzil se ain pahle ke paDav tak

सुनील मिश्र

सुनील मिश्र

मंज़िल से ऐन पहले के पड़ाव तक

सुनील मिश्र

और अधिकसुनील मिश्र

    मंज़िल से ऐन पहले के पड़ाव तक पहुँचना है बस

    चल यूँ रहे हैं कि एक ठहराव तक पहुँचना है बस

    समंदर तक के सफ़र में भी क्या रखा है उसके लिए

    लहर को किनारे से चली नाव तक पहुँचना है बस

    मेले में घूमते रहते हैं रात-दिन आवारा फिरा करते हैं

    सुकूँ की छोड़ो हमें मन-बहलाव तक पहुँचना है बस

    भटक जाने से बचना सीखते रहे चलना क्या सीखते

    कहीं पहुँचा दे हमें उस भटकाव तक पहुँचना है बस

    जिसके मायने तलाशने में दुनिया हलकान है कब से

    उसी मासूम तबस्सुम के फैलाव तक पहुँचना है बस

    हम टूटे तो बहुत दूर तक गईं हमारी किरचें भी बिखर

    सब समेटने को अब हमें बिखराव तक पहुँचना है बस

    स्रोत :
    • रचनाकार : सुनील मिश्र
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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