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अस पुरिखन कै नाक

as purikhan kai naak

अशोक अज्ञानी

अशोक अज्ञानी

अस पुरिखन कै नाक

अशोक अज्ञानी

और अधिकअशोक अज्ञानी

    अस पुरिखन कै नाक कटायो, सरम करौ।

    अम्मा का आसरम पठायो, सरम करौ॥

    जिन्दा मा बप्पा का ना कउरा दीन्ह्यो

    मगर मरे पर भोजु रचायो, सरम करौ॥

    बेटवन का खोपड़ी पर लीन्हे घूमि रह्यो

    बिटिया का तुम नाहि पढ़ायो, सरम करौ॥

    अगर बाज ते बाज लड़उतिउ तब जानित

    तीतर ते तुम बाज लड़ायो, सरम करौ॥

    मेहनत कै सम्मान होत है दुनिया मा

    लाज बेंचिकै महल बनायो, सरम करौ॥

    दुसरे की बीबी कै दामन भरत रह्यो

    अपनी का कुछहू ना लायो, सरम करौ॥

    आपन चेहरा कयिसा है यहु ना देख्यो

    दरपन पर सब दोस लगायो, सरम करौ॥

    स्रोत :
    • रचनाकार : अशोक अज्ञानी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित।

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