सुनल, अहाँक गाम केर लोक हँसइत अछि
sunal, ahank gaam ker lok hansait achhi
मायानंद मिश्र
Mayanand Mishra
सुनल, अहाँक गाम केर लोक हँसइत अछि
sunal, ahank gaam ker lok hansait achhi
Mayanand Mishra
मायानंद मिश्र
और अधिकमायानंद मिश्र
सुनल, अहाँक गाम केर लोक हँसइत अछि
कतेक नीक बात थीक, लोक बजइत अछि
हँसी भेटैत छै कहाँ, बजार अछि चढ़हल
हँसैत अछि केहन मुदा कतेक ठकइत अछि
कतेक टूटि गेलै घर, क्ते उजड़ि रहलै
खबरि तँ रोज रोज लोक कते पढ़इत अछि
हबकि रहल इजोतकेँ अन्हार अनचोखे
ई मील-पाथरो तकैत जेना कँपइत अछि
ठकैत अछि जिबैत लोक एतय जीवनकेँ
दिनहिमे कैक बेर लोक एतय मरइत अछि
सुखैल धार जकाँ पानि आँखिमे सुतल
उदास साँस से रातुक पहाड़ नपइत अछि
- पुस्तक : अवान्तर (पृष्ठ 16)
- रचनाकार : मायानन्द मिश्र
- प्रकाशन : मैथिली चेतना परिषद्, सहरसा
- संस्करण : 1977
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