सुनैत छी, कहैछ सब, केहन जमाना अछि
sunait chhi, kahaichh sab, kehan jamana achhi
मायानंद मिश्र
Mayanand Mishra
सुनैत छी, कहैछ सब, केहन जमाना अछि
sunait chhi, kahaichh sab, kehan jamana achhi
Mayanand Mishra
मायानंद मिश्र
और अधिकमायानंद मिश्र
सुनैत छी, कहैछ सब, केहन जमाना अछि
जिबैत अछि जतेक जीवनक बहाना अछि
पुछैछ हाल सब, बेहाल केर इच्छासँ
बेहाल केर जे हाल, नहि तकर ठेकाना अछि
हँसी बिकैत अछि, हँसी मुदा महग कतबा
हँसैत पर, हँसैत अछि, एहन दिबाना अछि
कतेक पानियोसँ सस्त खून भेल गेलै
कतेक आँखिमे बमक जेना खजाना अछि
कतेक लोक, लोकमे रहैछ, लोके सन
पड़ल जे असगरे लुटल कते घराना अछि
मरैत अछि से जीबि गेल, मरल जीवनसँ
अपन अपन जेबासँ पूर्व सब भजाना अछि
- पुस्तक : अवान्तर (पृष्ठ 33)
- रचनाकार : मायानन्द मिश्र
- प्रकाशन : मैथिली चेतना परिषद्, सहरसा
- संस्करण : 1977
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