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शहरिया से गाँव हो

shahariya se gaanv ho

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

शहरिया से गाँव हो

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

    दुअरा पर निमिया के घन बाटे छाँव हो।

    बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो॥

    मंगरू भगत लागें गाँव भर के काका।

    बचनू कँहार लागें बुढ़वन के दादा॥

    एके घर पुरोहित बानी लागे लोग पाँव हो,

    बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो॥

    जुड़ल एक दूजे से सनेहिया के तार बा।

    हिन्दू मुसलमान सबका आपस में प्यार बा॥

    जाति धरमवां के नाही बा बरांव हो,

    बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो॥

    मीलि जुलि लोग करे खेतिया किसानी।

    खेतवा में चले टिउबेलिया से पानी॥

    नदिया में चलेला जवरही नाव हो,

    बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो॥

    नाही बाटे गउवां में कवनो झमेला।

    मिले सहयोग नाही केहू बा अकेला॥

    सीधा सादा लोग जहाँ नाहीं बाटे दाँव हो,

    बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 19)
    • रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
    • प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
    • संस्करण : 2010

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