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सइयाँ माँगेला गवनवा हो राम बाराजोरी से

saiyan mangela gavanva ho raam barajori se

महेन्द्र मिसिर

महेन्द्र मिसिर

सइयाँ माँगेला गवनवा हो राम बाराजोरी से

महेन्द्र मिसिर

और अधिकमहेन्द्र मिसिर

    (निर्गुण)

    कुछो दिन नइहरा में खेलहूँ ना पवनीं, बाराजोरी से,

    सइयाँ माँगेला गवनवा हो राम बाराजोरी से।

    बभना निगोड़ा मोहे बड़ा दुख देला बाराजोरी से,

    उहे रे धरेला सगुनवाँ हो राम बाराजोरी से।

    लाली-लाली डोलिया के सबुजी ओहरिया बाराजोरी से,

    सइयाँ ले अइलें अगनवाँ हो राम बाराजोरी से।

    नाहीं मोरा लूर-ढंग नाहीं बा गहनवाँ बाराजोरी से,

    सइयाँ देखिहें मोर जोबनवाँ हो राम बाराजोरी से।

    मिलि लेहु, जुलि लेहु संग के सहेलिया हो बाराजोरी से,

    फेरु नाहीं होइहें मिलनवा हो राम बाराजोरी से।

    कहत महेन्द्र, कोई माने ना कहनवाँ हो बाराजोरी से,

    सइयाँ लेके चलले गवनवाँ हो राम बाराजोरी से।

    स्रोत :
    • पुस्तक : महेन्द्र मिसिर के चुनिंदा भोजपुरी गीत (पृष्ठ 94)
    • संपादक : भगवती प्रसाद द्विवेदी
    • रचनाकार : महेन्द्र मिसिर
    • प्रकाशन : सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2021

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