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भिनुसार हो गइल

bhinusar ho gail

मूंगालाल शास्त्री

मूंगालाल शास्त्री

भिनुसार हो गइल

मूंगालाल शास्त्री

और अधिकमूंगालाल शास्त्री

    खोल अलसाइल अँखिया भिनुसार हो गइल।

    थाकल–मादल चान लरूआइल

    ताकऽ तरेंगन के मुँह मल्हुआइल

    अबगे असोरवा के दियवा धुँआइल

    बाँस बसवरिया से पूरुबी बोअरिया से

    बोले चुचुहिया सुन गछिया का अरिया से

    सपना में गोरिया गोरथार हो गइल॥खो०॥

    ठूठी पकड़िया पर चिड़इन के जोड़वा

    कागिन अलवाँत कोइली बाड़ी लड़कोरवा

    गोतिनी गोदइला के नाहीं छोड़े कोरवा

    कुकुड़ूकू मुरगा डिहवा से बोले ननदी

    ना जाने राज कवन गँवे से खोले ननदी

    जुल्मी जवनिया इजहार हो गइल॥खो०॥

    गोचरो गौरैया के अंगना में चुन-चुन

    बैला के घांटी बाजे नदिया पर टुनटुन

    मधुरी बेअरिया गोरिया से कहे सुन-सुन

    गदराइल देहिया में लउकल उमरिया

    सन-सन बेअरिया उड़वलक अँचरिया

    कि गोरिया के घूघ छितनार हो गइल॥खो०॥

    मन्दिल के घंटा सिवनवा सुनाइल

    छप-छप कुटी काटस काका कन्हुआइल

    खुरी काटे बछवा तले गइया पेन्हाइल

    चानी के चढ़ावल पानी ओस गिरल मोती खानी

    उचरेला कागा काहे आज अंगना का छान्ही

    मोरिया पर गोरिया मति भोर हो गइल॥खो०॥

    छंइटी-छितनिया गोतिनिया हाथे बकरी

    लकठी देहिया पताइल जाला डगरी

    करत जम्हाई जागे जागल सारी नगरी

    चिड़ई-चुड़ुँगवा मचावे हुरदुँगवा

    कि अँचरा से पुरूबी निकाले लाल मूंगवा

    अब टिकुली पर कतना टिपोर हो गइल

    खोल अलसाइल अँखिया देख भोर हो गइल॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : भिनुसार हो गइल (पृष्ठ 54)
    • रचनाकार : मूंगालाल शास्त्री
    • प्रकाशन : भोजपुरी भारती, सारण
    • संस्करण : 2016

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