Font by Mehr Nastaliq Web

हमनीं का रहब जानी

hamnin ka rahab jani

महेन्द्र मिसिर

महेन्द्र मिसिर

हमनीं का रहब जानी

महेन्द्र मिसिर

और अधिकमहेन्द्र मिसिर

    (पूरबी)

    अतना बता के जइहऽ, कइसे दिन बीती राम!

    हमनीं का रहब जानी

    दूनो हो परानी,

    अंगना में कींच-काँच

    दुअरा पानी,

    खाला-ऊँचा गोड़ पड़ी

    चढ़ल बा जवानी। हमनीं का...

    देसे-विदेसे जालऽ

    जालऽ मुलतानी,

    केकरा छोड़ि जालऽ

    टुटही पलानी? हमनीं का...

    कहत महेन्दर मिसिर

    सुनऽ दिल जानी,

    केकरा से आग माँगब

    केकरा से पानी?

    हमनी का रहब सँगै

    दूनो हो परानी।

    स्रोत :
    • पुस्तक : महेन्द्र मिसिर के चुनिंदा भोजपुरी गीत (पृष्ठ 30)
    • संपादक : भगवती प्रसाद द्विवेदी
    • रचनाकार : महेन्द्र मिसिर
    • प्रकाशन : सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2021

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY