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पुरिबा किदन कहाँदन सुनबय

puriba kidan kahandan sunbay

मायानंद मिश्र

मायानंद मिश्र

पुरिबा किदन कहाँदन सुनबय

मायानंद मिश्र

और अधिकमायानंद मिश्र

    पुरिबा किदन कहाँदन सुनबय।

    नीमक ठाढ़ि माति गेलि सुनि-सुनि

    सिहरय, लजबय, बिहुँसय।

    गगनक कुंज, रास अछि लागल

    नखत-नखत अछि एखन हकारल

    कहत मनक के निश्चय।

    दिशि-राधा केर आँचर ससरल

    देखि रहल घनश्याम पियासल

    किरणक मुरली बजबय।

    धरणिक पत्र ज्योति केर मसि अछि

    नखतक आखर, दसखत शशि अछि

    पतिया पुनि पुनि पठबय।

    एसगरुआ केर वेदन केहनदन,

    उजड़ल उपड़ल मन-वृन्दावन

    दृग-यमुना जनु दरकय।

    पुरुषे श्याम प्रकृति अछि राधा

    दुहु अछि, दुहु हित आधा-आधा,

    सृष्टिक क्रम अछि चलबय।

    पुरिबा किदन कहाँदन सुनबय।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अवान्तर (पृष्ठ 41)
    • रचनाकार : मायानन्द मिश्र
    • प्रकाशन : मैथिली चेतना परिषद्, सहरसा
    • संस्करण : 1977

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