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जागरण

jagran

गोरख पांडेय

और अधिकगोरख पांडेय

    बीतऽता अन्हरिया के जमनवा हो संघतिया

    सबके जगा

    गंउवा जगा सहरवा जगा

    छतिया में भरल अंगरवा जगा

    जइसे जरे पाप के खनवा हो संघतिया

    सबके जगा

    तनवा जगा आपन मनवा जगा

    अपने जंगरवा के धनवा जगा

    ठग देखि मांगे जगरनवा हो संघतिया

    सबके जगा

    नेहिया के बन्हल परनवा जगा

    अंसुआ में डुबल सपनवा जगा

    मुकुती के मिलल वा वयनवा हो संघतिया

    सबके जगा

    हथवा जगा हथियरवा जगा

    करम जगा विचरवा जगा

    रोसनी से रचऽ नया जहनवा हो संघतिया

    सबके जगा

    बीतऽता अन्हरिया के जमनवा हो संघतिया

    सबके जगा द।

    स्रोत :
    • पुस्तक : गोरख पाण्डेय के भोजपुरी गीत (पृष्ठ 10)
    • संपादक : जीतेन्द्र वर्मा
    • रचनाकार : गोरख पाण्डेय
    • प्रकाशन : राष्ट्रीय पुस्तक न्यास
    • संस्करण : 2009

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