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जान तानीं हम सभ कर पूरा इतिहसवा हो

jaan tanin hum sabh kar pura itihasva ho

विजेन्द्र अनिल

विजेन्द्र अनिल

जान तानीं हम सभ कर पूरा इतिहसवा हो

विजेन्द्र अनिल

और अधिकविजेन्द्र अनिल

    जान तानीं हम सभ कर पूरा इतिहसवा हो

    रोअऽ जनि सबुर से काम लऽ किसनवा।

    जान तानीं गरमी में खूनवा जराई आपन

    पेटवा के आगि ना बुझवल किसनवा।

    बरखा के दिनवां में गोड़वा सराई आपन

    खेतवा में हरवा चलवल किसनवा।

    भर पेट सतुओ ना मिलेला भदउआ में

    तबहूँ ना तनीं सुहुतइल किसनवा।

    जाड़वा के रतिया में गतर गलाई आपन

    खेतवा के धानवा रखवल किसनवा।

    आन्ही-पानी, लूक-पाला सहल बधरिये में

    घरवा के सुखवा का जनल किसनवा।

    सालो भर देहिया के हाड़वा गलाई आपन

    खेतवा से बोझवा उठवल किसनवा।

    धानवां के देई के ओसावन जब कई लिहल

    आई गइलें तबे साहुकार हो किसनवा।

    धानवा तोहार लेके घर आपन भरि लिहलन

    टुकुर-टुकुर तिकवत रहल किसनवा।

    साल भर के मेहनत छन में खतम भइल

    नाहीं कुछ कइ सकल तू हो किसनवा।

    सेठ-साहूकार चाभसु पेड़ा-रसगुलवा हो,

    तोहरा के सतुआ मोहाल हो किसनवा।

    चेतऽ चेतऽ चेतऽ तुहूँ, अबहूँ बा बेरवा हो

    अबहूँ से होख तइयार हो किसनवा।

    अपने में फूटल बाड़, एही से तू टूटल बाड़

    एही से गांठेला सभे रोब हो किसनवा।

    फूटवा के बिअवन के अजुए जरा तुहूँ

    देखऽ केहू नइखे बरियार हो किसनवा।

    जबले दबल रहब, तबले दबाई सभे

    उठला पंजरा आई हो किसनवा।

    घरवा में आह भरि, लोरवा गिरवला से

    फायदा ना होई एको पाई हो किसनवा।

    जब ले ना कसब तू कमर लड़ाई खातिर

    तब ले ना तोहरो भलाई हो किसनवा।

    स्रोत :
    • पुस्तक : विजेन्द्र अनिल के गीत (पृष्ठ 5)
    • रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
    • प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
    • संस्करण : 1993

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