Font by Mehr Nastaliq Web

इहे पहिचान बाटे

ihe pahichan bate

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

    हमरी गउवां के इहे पहिचान बाटे।

    जहाँ खेतवा जोतत किसान बाटे॥

    मटिया जहाँ के हऽ बड़ी उपजाऊ।

    गाँव के किसान हउवे पूत कमाऊ॥

    डटल खेतवा में सँझवा बिहान बाटे।

    हमरी गउवां के इहे पहिचान बाटे॥...

    रतिया के करेला खेत के सिंचाई।

    खेतवा की चिन्ता में नीदिया ना आई॥

    जेकर गेहुंआ की बलिया में जान बाटे।

    हमरी गउवा के इहे पहिचान बाटे॥...

    ईद बकरीद मनै इहवां दीवाली।

    लड़िका जनमला पर बाजेला थाली।

    जहाँ शादी में होत मंगल गान बाटे।

    हमरी गउवां के इहे पहिचान बाटे॥...

    निमिया पर रहेली जहाँ काली माई।

    पूजेली जेकरा के रोज हमार ताई॥

    जहाँ पिपरा पर ब्रह्म स्थान बाटे।

    हमरी गउवां के इहे पहिचान बाटे॥...

    स्रोत :
    • पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 21)
    • रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
    • प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
    • संस्करण : 2010

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY