नैन मिले अनमोल

शतदल

नैन मिले अनमोल

शतदल

और अधिकशतदल

    जोगन, नैन मिले अनमोल,

    ओस कनों से कोमल सपने

    पलकों-पलकों तौल!

    जोगन, नैन मिले अनमोल!

    इन सपनों की बात निराली,

    दिन-दिन होली, रात दिवाली।

    इनसे माँग नदी-झरनों के

    मीठे-मीठे बोल!

    जोगन, नैन मिले अनमोल!

    सपनों का क्या ठौर-ठिकाना,

    जाने कब आना, कब जाना।

    नयन झरोखों से तू अपनी

    दुनिया में रस घोल,

    जोगन, नैन मिले अनमोल।

    स्रोत :
    • रचनाकार : शतदल
    • प्रकाशन : कविता कोश

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