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सिया सँ रामक परतर

siya san ramak partar

कालीकान्त झा ‘बूच’

कालीकान्त झा ‘बूच’

सिया सँ रामक परतर

कालीकान्त झा ‘बूच’

और अधिककालीकान्त झा ‘बूच’

    मानै छी सुनियौ रघुवंशी पुरुष अहाँ बेजोड़ औ,

    हमरा सिया सखी लग लेकिन लागै छी किछु थोड़ औ।

    अपने केँ जन्मौलनि माता, सीता हमर सहज संजाता,

    कतबो सुन्नर श्याम मुँदा छी, कतबो गुनगर राम मुँदा छी,

    अपने नीलाकाश जानकी, लाली पसरल भोर औ।

    मादक दृष्टि कमल दल लोचन मुँस्की कामदेव मदमोचन,

    नशा बनल चढ़ि रहल नेह अछि, बिसरल छी हम कतऽ देह अछि,

    मुँदा सियाक दिव्य दर्शन मे अमृते केर बोर औ।

    धनुषा तोड़ल पाबि जुआनी, तहिये सँ छी नामी गामी,

    बाउ अधिक जुनि बनू गुमानी ताहि धनुखा केर सुनु पिहानी

    तकरा बाल्यावस्थे मे उठा लेलनि कऽ कोर औ।

    उच्च विचार आचरण सादा, सदिखन संयोगल मरयादा,

    आइ कतऽ रहि गेल बपौटी, पिछरल चरण करीनक पौटी

    फलक साधिका सीता हम्मर अपने फूलक चोर औ।

    हमरा सिया...

    स्रोत :
    • पुस्तक : कलानिधि (पृष्ठ 55)
    • रचनाकार : कालीकान्त झा ‘बूच’
    • प्रकाशन : श्रुति प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2010

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