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चंचल मन ये जीता जिसने तुममें ऐसा कोई है

chanchal man ye jita jisne tummen aisa koi hai

अमन अक्षर

अमन अक्षर

चंचल मन ये जीता जिसने तुममें ऐसा कोई है

अमन अक्षर

और अधिकअमन अक्षर

    चंचल मन ये जीता जिसने तुममें ऐसा कोई है

    एक तुम्हारे पीछे हमने अपनी सुध बुध खोई है

    बस्ती-बस्ती गीत लिए हम अपनी बातें कहते हैं

    कुछ गीतों की नैया ले हम अपनी नदिया गहते हैं

    मन जब तुमसा होकर अक्सर हमसे झगड़ा करता है

    तब लगता है मन भीतर सब लोग तुम्हारे रहते हैं

    अपनी होनी अनहोनी भी एक ही साँस पिरोई है

    एक तुम्हारे पीछे हमने अपनी सुध-बुध खोई है

    भावुकता का सूरज निस-दिन चढ़ता और उतरता है

    याद का चंदा नियमित आकर ठँडी आहें भरता है

    जीवन तुम तक सीमित होकर पूरी दुनिया जैसा है

    तुमसे बाहर आकर अपनी छाया से भी डरता है

    प्यार की दुनिया में ही हमने अपनी दुनिया बोई है

    एक तुम्हारे पीछे हमने अपनी सुध-बुध खोई है

    किसी कल्पनालोक में बीते वो जीवन ही अच्छा है

    इस तर्कों वाली दुनिया से ये प्रेमी मन ही अच्छा है

    आस का हर पत्ता आख़िर जब उस डाली से टूट गया

    यूँ लगता है प्रियतम अपना ख़ालीपन ही अच्छा है

    मन बैठी एक लड़की अक्सर ऐसा सुनकर रोई है

    एक तुम्हारे पीछे हमने अपनी सुध-बुध खोई है

    स्रोत :
    • पुस्तक : एक लड़की (पृष्ठ 85)
    • रचनाकार : अमन अक्षर
    • प्रकाशन : हिन्द युग्म
    • संस्करण : 2024

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