चलऽ चलीं खेतवा में धनियां
chalऽ chalin khetva mein dhaniyan
रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
Rambahadur ‘Adhir Pindvi’
चलऽ चलीं खेतवा में धनियां
chalऽ chalin khetva mein dhaniyan
Rambahadur ‘Adhir Pindvi’
रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
रिम-झिम बरसेला पनियां,
चलऽ चलीं खेतवा में धनियां।
छम-छम बाजे पयजनियाँ,
चलऽ चलीं खेतवा में धनियां॥...॥
खेतवा में धनवा खूब लहराला।
देखि-देखि मनवां हमरो अघाला॥
अबकी ना रही परेसनियाँ,
चलऽ चलीं खेतवा में धनियां॥...॥
हो जाई पूरा सब तोहरो सपनवां,
तोहके गढ़ाइबि सोना चानी के गहनवां॥
नथुनी पाजेब करधनियाँ,
चलऽ चलीं खेतवा में धनियां॥...॥
अबकी आपन दुःख सब मिटि जाई,
छोटका गदेलवा भी पढ़े अब जाई॥
जोर मारे धान अगहनियां,
चलऽ चलीं खेतवा में धनियां॥...॥
खर पतवार सब बीनि के निराव।
अबहू से तू आपन भागि जगाव॥
मनवा से करऽ ना सोहनियां,
चलऽ चलीं खेतवा में धनियां॥
- पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 6)
- रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
- प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
- संस्करण : 2010
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