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बिदाई गीत

bidai geet

मूंगालाल शास्त्री

और अधिकमूंगालाल शास्त्री

    ना रूकेब जाईं बिदाई ईहे,

    रउरा खातिर नयनवा तरसते रही॥

    सतरंगी सुधियन के बनी हिलोरवा।

    आस आसमानवा में ढ़ुली साँझे-भोरवा॥

    भलहीं ना कजरी मन मोरवा ना बदरी, बरसते रही,

    रउरा खातिर सावनवा बरसते रही॥

    थाकल देहिया खोजी जब चैना

    टिसुना टटात रही बन्द कके नैना॥

    भलहीं ना निनिया सेजिया सोहावन सवँरते रही,

    रउरा खातिर सपनवाँ सँवरते रही।

    धीरिज का धार पर नेहिया बा खाड़ा।

    छछनत बा साध दिल दरकत बा आड़ा।

    भलही ना लोरवा बा नगदी हँसी हहरते रही,

    रउरा खातिर हियरवा हकरते रही॥

    तीहा के कागा कुररी मुरेड़ से।

    सुध-बुध लवटी लहरो ले देर से॥

    भलही ना जोगिनी लउकी ना लछन उचरते रही,

    रउरा खातिर सगुनवा उचरते रही॥

    पसंगों के पाईंच पतझड़ ना माने।

    कइसन के रीति ना प्रीते गदाने॥

    भलही ना छेहिरा के सेहरा हो सनमुख कुछ कहते रही,

    रउरा खातिर फगुनवा कुछ कहते रही॥

    ना रुकेब...नयनवा तरसते रही॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : भिनुसार हो गइल (पृष्ठ 40)
    • रचनाकार : मूंगालाल शास्त्री
    • प्रकाशन : भोजपुरी भारती, सारण
    • संस्करण : 2016

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