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अँजुरी के फूल

anjuri ke phool

भोलानाथ गहमरी

भोलानाथ गहमरी

अँजुरी के फूल

भोलानाथ गहमरी

और अधिकभोलानाथ गहमरी

    अँजुरी के फूल कई सपना के डार से

    ले अइलीं चुपके से तोर—

    कि हो हम ले अइलीं चुपके से तोर।

    फुलवा तोरत के गड़ि गइलें काँटा,

    गड़ि गइलें काँटा ओहू से रहे नाता,

    जोरलि सनेहिया के डोर।

    कि हो हम ले अइलीं…

    रंग-रंग पर किरन के पहरा,

    किरन के पहरा पंखुरिया के अँचरा,

    लागल नजरिया के चोर।

    कि हो हम ले अइलीं…

    गंध छोड़े बाँह पवन के,

    बाँहँ पवन के हो गरवा मिलन के,

    नेहियाँ भइलि सराबोर।

    कि हो हम ले अइलीं…

    जिनिगी के बगिया में भँवरा उमर के,

    भँवरा उमर के ना डोले संभर के,

    हो जाला रस से बिभोर।

    कि हो हम ले अइलीं…

    स्रोत :
    • पुस्तक : लोक रागिनी (पृष्ठ 213)
    • रचनाकार : भोलानाथ गहमरी
    • प्रकाशन : रागिनी प्रकाशन, गाजीपुर
    • संस्करण : 1995

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