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अइसन अनेत हो गइल

aisan anet ho gail

विजेन्द्र अनिल

विजेन्द्र अनिल

अइसन अनेत हो गइल

विजेन्द्र अनिल

और अधिकविजेन्द्र अनिल

    अइसन अनेत हो गइल

    हरियाली रेत हो गइल।

    सोना के चिरंई अस देस

    नेता के पेट हो गइल।

    पुरुब के लाल रजाई

    पच्छिम के भेंट हो गइल।

    गाड़ी के कवन बा कसूर

    घरहीं में लेट हो गइल।

    जिनिगी भर खटले महँगू

    मालिक के खेत हो गइल।

    अब पटरी नीमन बइठी

    चोर-चोर भेंट हो गइल।

    स्रोत :
    • पुस्तक : विजेन्द्र अनिल के गीत (पृष्ठ 27)
    • रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
    • प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
    • संस्करण : 1993

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