सुतलीमे छलौं हम लाली रे पलंगिया
sutlime chhalaun hum lali re palangiya
(चैतावर)
सुतलीमे छलौं हम लाली रे पलंगिया
सपना देखल अजगुतिया हो रामा
चैत मास चुनरी चैत मास चुनरी
रंगावितौं हो रामा
एक सपना देखलौं दोसर हम देखलौं
तेसरहि पिया परदेसिया हो रामा
एली फूल तोड़लौं चमेली फूल तोड़लौं
गाँथलहुँ फूलकेर हारवा हो रामा
एहि अवसरपर पहु यदि आबितथि
एहि माला पहिरावितौं हो रामा
एहन दिन मोरा फेर कब अओतै
दुनू मिलि पलंगा रमनमा हो रामा
- पुस्तक : मैथिली लोकगीत (पृष्ठ 349)
- संपादक : अणिमा सिंह
- प्रकाशन : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
- संस्करण : 1993
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