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राग हलूर का गीत

raag halur ka geet

अज्ञात

अज्ञात

राग हलूर का गीत

अज्ञात

और अधिकअज्ञात

    दल रे बादल बिन चमक्यो तारे

    कि सांझ पड़े पियु लागे प्यारो

    कई रे जुवाब करूँ रसिया से

    को रसियाजी तमखे किने बिलमाया

    तो छोटी का जात बड़ी बिलमाय

    बिछिया को रस अनवट लीनो

    तो अनवट को रस रामचन्द्र लीनो

    कई र जुवाब करूँ रसिया से

    जवाब करूँगी, सवाल करूँगी

    केसरिया रा नैणां में रीझ रहूंगी

    पातलिया रा नैणां में रीझ रहूंगी

    दल बादल के बीच चमका तारा

    कि सांझ पड़े पिय लगता है प्यारा

    क्या रे जवाब लूं रसिया से

    को रसियाजी तुम्हें किसने देरी करादी

    तो छोटी के यहाँ जाते हुए बड़ी ने देरी करादी

    बिछियों का रस अनवट ने ले लिया

    और अनवट का रस रामचन्द्र ने ले लिया

    क्या रे जवाब लूँ रसिया से

    जवाब लूँगी, सवाल करूँगी

    केसरिया के नैनों में रीझ रहूँगी

    पातलिया (पतले) के नैनों में रीझ रहूँगी

    स्रोत :
    • पुस्तक : मालवा के लोक गीत (पृष्ठ 1)
    • संपादक : कपिल तिवारी, नवल शुक्ल
    • रचनाकार : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित।
    • प्रकाशन : मध्यदेश आदिवासी लोक कला परिषद्
    • संस्करण : 1995

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