Font by Mehr Nastaliq Web

प्यारे रहि जइयो मिथिला नगरियामे

pyare rahi jaiyo mithila nagariyame

अज्ञात

अज्ञात

प्यारे रहि जइयो मिथिला नगरियामे

अज्ञात

और अधिकअज्ञात

    (बारहमासा)

    रामचन्द्र रहि जइयो मिथिला नगरिया

    प्यारे रहि जइयो मिथिला नगरियामे

    आयल माघहि मास लियऽ प्रेम के रजाइ

    जाड़ लागत दुनू के सरिरवामे

    प्यारे रहि जइयो मिथिला नगरियामे

    आयल फागुन मास सब अति रे हुलास

    रंग घोरि-घोरि छीटन चदरियामे

    प्यारे रहि जइयो मिथिला नगरियामे

    सब सुख मिलत ससुररियामे

    चैतहि मास चित अति रे हुलास

    अहाँ के चटनी खुआयब कोहबर घरमे

    आयल मास बैसाख घाम सहलो जाय

    चन्दन घसि-घसि लेपब सरिरवामे

    रामचन्द्र रहि जइयो मिथिला नगरियामे

    सब सुख मिलत ससुररियामे

    आयल जेठहि मास घाम सहलो जाय

    रस बेनिया डोलायब कोहबर घरमे

    आयल मास असाढ़ जल बरिसय लाग

    प्यारे अहाँकेँ घुमायब छतरियामे

    आयल सावन मास झूला झुलू सरकार

    झूला झूलि लियऽ लाले फुलबरियामे

    आयल भादव मास नैया होइए तैयार

    झिलहरि खेलि लियऽ जमुना के जलवामे

    आयल आसिन मास आस लागल हमार

    आस झूलि लियऽ कदम के गछियामे

    आयल कातिक मास शान्ति के एतहि मंगायब

    मीठ मिठैया खिलायब बजरियामे

    आयल अगहन मास सखि सब अति रे हुलास

    रामचन्द्र अहाँकेँ मंगायब बियाह पंचमीमे

    रस गरिया सुनायब कोहबर घरमे

    स्रोत :
    • पुस्तक : मैथिली लोकगीत (पृष्ठ 367)
    • संपादक : अणिमा सिंह
    • प्रकाशन : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1993

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY