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प्रथम मास असाढ़ सखि हे

pratham maas asaDh sakhi he

अज्ञात

अज्ञात

प्रथम मास असाढ़ सखि हे

अज्ञात

और अधिकअज्ञात

    (बारहमासा)

    प्रथम मास असाढ़ सखि हे चहुदिश गरजै मेघ यो

    मेघो जे गरजै हिया मोरा सालै गरजि-गरजि हिया साल यो

    सावन सर्द बुन्द झहरै बिजुवन कुहुकै मयूर यो

    मयूर जे कुहुकै हिया मोर सालै कुहुकि-कुहुकि हिया साल यो

    भादव भरल सरोवर सखि हे दोसर राति अन्हार यो

    पिया जौं रहितै संग भए सुतितौं खेपितौं मे भादवक राति

    आसिन हे सखि आस लगाओल आसो पुरल हमार यो

    हमरो बिपतिया पड़िहौ जे कुबजी जे पिया राखल लोभाय यो

    कातिक हे सखि पर्व बहुत सन सब सखि गंगा स्नान यो

    मातु-पिता गुरु सेवा करियौ घरहिमे छथि भगवान यो

    अगहन हे सखि सारि लबिये गेल लबि गेल सब रंग धान यो

    घर के सम्पतिया स्वामि बेचि खाओल मरब जहर बिष खाय यो

    पूस सखि हे जाड़ लगै अछि भीजि गेल दच्छिन चीर यो

    भीजिए गेल साँझ पड़िये गेल भीजि गेल पिया के शरीर यो

    माघ सखि हे जाड़ लगै अछि सब सखि सिरक भराय यो

    पिया जौं रहितथि संग भए सुतितौं खेपितौं माघक जाड़ यो

    फागुन हे सखि रंग मचै अछि घोरितौं रंग-अबीर यो

    वैह रंग लए हम पिया सिर ढारितौं छीटितौं अतर गुलाब यो

    चैत सखि हे फूल फूलिए गेल फूलो गेल भकुवाय यो

    ओही फूल हम हार बनावितौं भेजितौं पिया के सन्देश यो

    बैसाख सखि हे इटवा पथावितौं ऊँच कए महल बनाउ यो

    ओही महलमे पिया हम सुतितौं अँचरा से बेनिया डोलावितौं यो

    जेठ सखि हे हेठ भेल बरषा पिया आबि तुलावल यो

    हम पतिवर्त्ता गावोल बरहमासा पूरि गेल बारहों मास यो

    स्रोत :
    • पुस्तक : मैथिली लोकगीत (पृष्ठ 370)
    • संपादक : अणिमा सिंह
    • प्रकाशन : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1993

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