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रामचन्द्र रहि जइयो मिथिला नगरमे

ramchandr rahi jaiyo mithila nagarme

अज्ञात

अज्ञात

रामचन्द्र रहि जइयो मिथिला नगरमे

अज्ञात

और अधिकअज्ञात

    (बारहमासा)

    रामचन्द्र रहि जइयो मिथिला नगरमे कोहबर के व्यवहार यो

    आसिन न्योत पठायल कातिक धनुष तोडायल

    अगहन कऽ देल सीतासँ विवाह यो कोहबर के व्यवहार यो

    पूस कोहबर घर बनौलौं माघ कोहबर बैसाइयो

    फागुन खेलि लियऽ रंग अंबीर यो

    चैतक फुलवा लोढ़ि कै लायब बैसाख हार गुथायब यो

    जेठ माला पहिरायब सीता वर कै कोहबर के व्यवहार यो

    अषाढ़ बरसै दिन-राति सावन झूला लगाय

    भादव करि देल कोहबर घर अन्हार यो

    रामचन्द्र रहि जइयो मिथिला नगर यो कोहबर के व्यवहार यो

    स्रोत :
    • पुस्तक : मैथिली लोकगीत (पृष्ठ 368)
    • संपादक : अणिमा सिंह
    • प्रकाशन : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1993

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