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मैथिली लोकगीत : खेलइत छलि माता ओहि कदमतर

maithili lokgit ha khelit chhali mata ohi kadamtar

अन्य

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रोचक तथ्य

संदर्भ—बाललीला।

खेलइत छलि माता ओहि कदमतर,

तनियो ने कृष्न डराथु री।।1।।

गरा सोभिन्हि यंत्र माला,

होठ सोभइन्हि बाँसुरी।

हाथ सोभइन्हि लाल छड़िया,

तनियो कान्ह डराथु री।।2।।

घर पइसि कान्हा दधि मटुकिया,

छीक चढ़ि घिव खाथु री।

घिव खाइत माता चोर पकड़ल,

तनियो ने कान्ह डराथु री।।3।।

श्रीकृष्ण उस कदंब के नीचे खेल रहे थे, वे तनिक भी नहीं डरते।।1।।

श्रीकृष्ण के गले में वैजयंती माला शोभा देती है और ओठों पर बाँसुरी सुशोभित है। उनके हाथों में लाल छड़ी शोभा देती है और वे किंचित् भी नहीं डरते।।2।।

कृष्ण घर में घुसकर मटकी से दही और छींके पर चढ़कर घी खाते हैं। हे सखी! माता यशोदा ने उन्हें घी खाते हुए पकड़ लिया, किंतु वे ज़रा भी नहीं डरते।।3।।

स्रोत :
  • पुस्तक : हिंदी के लोकगीत (पृष्ठ 58)
  • संपादक : महेशप्रताप नारायण अवस्थी
  • प्रकाशन : सत्यवती प्रज्ञालोक
  • संस्करण : 2002

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